Share Kya Hai | शेयर कैसे खरीदते हैं? शेयर से पैसे कैसे कमाए

लोग सोचते हैं कि Share Market में पैसे लगाकर वे रातोरात मालामाल हो जायेंगे। अपनी बचत को हर कोई बढ़ाना चाहता है और अगर कही पैसे डालने के सोच रहे है तो स्टॉक मार्केट से अच्छी जगह शायद ही कही हो। इस बाजार में हर कोई अमीर बनना चाहता है लेकिन उसके लिए आपको शेयर बाजार की बारीकियों को समझना होगा जैसे शेयर मार्किट में शेयर का मतलब क्या है, कैसे ख़रीदे जाते हैं, और सबसे ज़रूरी बात, किसी कंपनी के शेयर बेचकर पैसे कैसे कमाये जाते हैं।

अगर आपने इन सब चीज़ों को सीख लिया और स्टॉक मार्किट की बेस्ट बुक्स पढ़ ली तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। ज्ञान सबसे ज़्यादा ज़रूरी है क्योंकि जिसके पास 21वी सदी में ज्ञान है वही अमीर है। हमारे इसी ब्लॉग पर आपको स्टॉक मार्किट से जुडी साडी बेसिक जानकारी मिल जाएगी तो अगर आप एक Beginner हैं तो एक एक करके हमारे लेख पढ़ सकते हैं। आपको पढ़ने में बहुत मज़ा आएगा और काफी कुछ सीखने को मिलेगा जो हमारे यहाँ बिलकुल फ्री है।

Share Meaning in Hindi

साधारण भाषा में शेयर का मतलब “हिस्सा” या “भाग” होता है। जैसे हमने कोई पिज़्ज़ा लिया और उसे चार लोगों के बीच में बाँट दिया या फिर आपने एक केक लिया और सभी लोगो में बराबर बाँट दिया। एक प्रकार से हम शेयर करने को डिवाइड करना भी कह सकते हैं क्योंकि इसमें  सभी को कुछ न कुछ मिल रहा है। 

अब वित्तीय बाजार में भी इसका मतलब कुछ इसी प्रकार है जैसे पिज़्ज़ा, रूम, आइस क्रीम, प्रॉपर्टी, घर, मकान आदि आपस में बांटे जाते हैं उसी प्रकार कंपनियों अपना कुछ भाग शेयर के रूप में बाँटती हैं लेकिन अंतर इतना होता है कि कंपनी के शेयर की कीमत हर रोज़ घटती बढ़ती रहती है जबकि अन्य बताई गयी चीज़ों की कीमत ज़्यादातर समय एक सी रहती है।

What is a Share?

शेयर किसी कंपनी की हिस्सेदारी लेने की सबसे छोटी इकाई को कहते हैं | जब आप किसी भी कंपनी का एक share खरीदते हैं तो उस कंपनी के एक छोटे से हिस्से के मालिक बन जाते हैं लेकिन एक कंडीशन ये है कि आप जिस कंपनी के शेयर खरीदना चाह रहे हैं वो स्टॉक एक्सचेंज के अंदर होनी चाहिए | मतलब अगर आप किसी भारतीय कंपनी के शेयर खरीदना चाहते हैं तो उस कंपनी का नाम NSE या BSE में होना चाहिए। 

Share Kya Hai

जब तक आप शेयर खरीदकर अपने पास रखते हैं तब तक आप छोटे ही सही पर उस कंपनी के मालिक बन जाते हैं।  जैसे अगर आप एयरटेल का एक शेयर(700 रुपया) खरीदते हैं तो आप कह सकते हैं कि एयरटेल आपकी है। हालाँकि ये एक बहुत छोटा हिस्सा होगा क्योंकि कंपनी के लगभग 588 करोड़ शेयर स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड हैं। 

अब अपने आप सोचिये प्रमोटर मतलब कंपनी को चलाने वाले लोगों के पास टोटल 210 करोड़ शेयर हैं जिनके बाद वे 36% कंपनी के मालिक हैं और FII के पास 113 करोड़ शेयर्स हैं जिसके बाद भी वे केवल  20% कंपनी के मालिक हैं। इस हिसाब से अगर आप 1% भी मालिक बनना चाहते हैं तो एयरटेल में आपको कम से कम 27 करोड़ शेयर खरीदने पड़ेंगे। जो कि आम आदमी के लिए लगभग नामुमकिन है। लेकिन आप 700 रूपये का एक शेयर खरीदकर कह जरूर सकते हैं कि आप भी एयरटेल पर हक़ रखते हैं।

कम्पनियाँ Share क्यों बेचती है ?

अब आपके मन में ये सवाल आ रहा होगा कि जब ये कंपनियां पहले से ही बड़ी होती हैं तो इनको अपनी हिस्सेदारी बेचने की क्या ज़रूरत है।  ऐसी क्या बात है जो इन कंपनियों को शेयर के रूप में बेचने की और धकेलती है। इसका जवाब बिलकुल सीधा सा है क्योंकि कम्पनियाँ और विकासशील बनना चाहती हैं और जब उनके पास पैसे कम पड़ते हैं तो वे अपनी कंपनी की थोड़ी हिस्सेदारी बेचकर बाजार से पैसा उठाती है।

जब कंपनियों को पैसों की दरकार होती है तो उनके पास दो विकल्प होते हैं जिसमे से पहला है लोन। या तो कम्पनियाँ बैंक से लोन लेकर अपना काम आगे बढ़ाएं या फिर दूसरा विकल्प इक्विटी का इस्तेमाल करके स्वयं का कुछ भाग नीलाम करें और मार्किट से पैसा उठायें जिस पर उनको कोई ब्याज भी नहीं देना पड़ेगा। 

पब्लिक शेयर क्यों खरीदती है?

इस जुल्मी दुनिया में हर कोई पैसे कमाना चाहता है। जनता भी ये सोचकर किसी कंपनी का Share खरीदती है कि वो आगे जाकर तरक्की करेगी जिससे उनके शेयर की कीमत बढ़ेगी और उन्हें फायदा होगा।

शेयर कैसे खरीदते हैं?

शेयर खरीदने के लिए आपको एक डीमैट अकाउंट की जरुरत पड़ती है जिसमे आपके ख़रीदे गए शेयर रखे जाते हैं। और जैसे जैसे आपके ख़रीदे गए शेयर की कीमत बढ़ती है आप पैसा कमाते हैं। जैसे कि अपने abc कंपनी का शेयर 59 रूपये में लिया और उसकी कीमत कुछ दिन बाद बढ़कर 78 रूपये हो गयी तो अगर आप इस समय बढ़ी हुई कीमत पर अपना शेयर बेचते हैं तो आपको फायदा होगा। इस प्रकार से स्टॉक मार्किट में शेयर बेचकर पैसे कमाए जाते हैं।

शेयर कितने प्रकार के होते हैं?

Share मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं: इक्विटी, प्रेफेरेंटिअल, और डीवीआर।

Equity Share Meaning

इक्विटी शेयर सबसे ज़्यादा कॉमन शेयर का प्रकार हैं जिसमे अधिकतर लोग ट्रेड करना पसंद करते हैं। रोज़ाना स्टॉक मार्किट में अरबों इक्विटी शेयर ट्रेड किये जाते हैं जिनकी वजह से मार्किट हर पल घटता बढ़ता रहता है।

ये शेयर मार्किट की सभी कंपनियों द्वारा जारी किये जाते हैं और इनमे बाकि प्रकार की तुलना में सबसे ज़्यादा सुविधाएँ दी जाती हैं जैसे कंपनी में वोटिंग का अधिकार, डिविडेंड मिलना और यदि अपने ढेर सारे इक्विटी शेयर ले रखें है तो वह कंपनी आपको बोर्ड की मीटिंग में एक सीट भी प्रदान करेगी।

Preference Share Meaning

इन्हे भी हम एक प्रकार का इक्विटी शेयर बोल सकते हैं पर ये इक्विटी शेयर की तुलना में ज़्यादा सुरक्षित होते हैं क्योंकि इसमें शेयर धारक पहले से भुगतान की राशि निर्धारित कर लेता है जो उसे सीमा समाप्त होने के बाद दी जाएगी। डिविडेंड भी आम शेयर धारको से पहले मिलता है और डिविडेंड की दर पहले से निर्धारित होती है।

अब अगर कंपनी bankrupt भी हो जाये तो शेयरहोल्डर को उसके पैसे मिल जायेंगे जबकि इक्विटी में ऐसा कुछ नहीं होता। उसमे अगर कंपनी डूबी तो आपके पैसे भी डूब गए समझों। लेकिन सिर्फ एक जगह ऐसी है जहाँ इक्विटी बाज़ी मार जाता है, वह है वोटिंग का अधिकार।

DVR Share Meaning

DVR का फुल फॉर्म होता है Differential Voting Rights। जैसा की नाम से पता चल रहा है, इसमें वोटिंग के अधिकार अलग होते हैं। उदाहरण के लिए भारत के स्टॉक एक्सचेंज में फिलहाल तीन कंपनियों के DVR शेयर उपलब्ध हैं जिनमे टाटा मोटर्स, जैन इरीगेशन और फ्यूचर एंटरप्राइज शामिल हैं।

टाटा मोटर्स सबसे पहले कंपनी थी जो भारत में डीवीआर नाम के शेयर लायी थी ताकि कोई व्यक्ति ज़्यादा से ज़्यादा शेयर खरीदकर कंपनी को अपने नाम न करले। पहले कंपनी को एक शेयर पर एक वोटिंग राइट देना पड़ता है जबकि DVR नाम के शेयर लाने के बाद 10 शेयर खरीदने पर एक वोट मिलता है।

तो क्या फिर हमें सबसे बेकार तरीके के शेयर मिल गए हैं?

बिकुल नहीं। उल्टा इनसे तो आपको और ज़्यादा फायदा होगा क्योंकि ये आम इक्विटी शेयर की तुलना में 35%- 40% सस्ते मिलते हैं। जितने में एक कॉमन शेयर आता उतने में तो आप 3 डीवीआर शेयर खरीद सकते है और बाकियों की तुलना में अधिक प्रॉफिट बना सकते हैं।

अब मुझे ये बताने की भी ज़रूरत नहीं है कि आपको हर शेयर पर डिविडेंड भी मिलेगा और जितने ज्यादा शेयर उतना ज़्यादा डिविडेंड पर इसका उल्टा भी उतना ही सच होगा, जितना कंपनी को नुकसान होगा उससे ज़्यादा आपको होगा क्योंकि ज़्यादा शेयर होंगे।

Conclusion

मुझे उम्मीद है कि आपको समझ आया होगा कि शेयर क्या होता है और शेयर कितने प्रकार के होते हैं। वैसे तो और भी तरह के शेयर होते हैं लेकिन भारत में केवल इन्ही तीन प्रकार के शेयर उपलब्ध हैं। किसी दिन बाकि बचे शेयर के प्रकारों के बारें में भी जानेंगे। जब तक के लिए मुस्कुराते रहिये और सीखो निवेश पर सीखते रहिये।

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